शाहीडीह स्थित बाबा राज-राजेश्वर स्थान में सावन के दूसरे सोमवार को हुआ भव्य श्रृंगार पूजन

हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में देर रात तक चला भजन-कीर्तन, मंदिर परिसर हुआ शिवमय

सहरसा – जिले के नवहट्टा नगर पंचायत के अंतर्गत शाहीडीह वार्ड संख्या 14 स्थित बाबा राज-राजेश्वर स्थान में सावन माह के दूसरे सोमवार को अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में श्रृंगार एवं पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन स्थानीय श्रद्धालुओं एवं बाबा राजराजेश्वर पूजा समिति के संयुक्त प्रयास से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें हजारों की संख्या में भक्तों ने भाग लिया। इस अवसर पर प्रातःकाल से ही मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से कतारबद्ध होकर बाबा के दर्शन किए। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ हुई। बाबा राजराजेश्वर के स्वयंभू शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शुद्ध जल) से अभिषेक कर विशेष श्रृंगार किया गया। श्रृंगार में पुष्प, चंदन, भस्म, बेलपत्र, रुद्राक्ष, आभूषण एवं पारंपरिक वस्त्रों का प्रयोग कर बाबा को अलौकिक रूप दिया गया। श्रद्धालुओं ने बाबा के दिव्य श्रृंगार दर्शन करते समय गहरी भक्ति भावना प्रकट की। कई श्रद्धालु दर्शन के दौरान भाव-विभोर हो गए और कुछ की आंखों से आंसू छलक पड़े। बाबा के अलौकिक स्वरूप के दर्शन ने भक्तों को एक आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की। संध्या समय मंदिर प्रांगण में भजन-कीर्तन का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय संकीर्तन मंडलियों ने एक से बढ़कर एक भक्तिपूर्ण गीत प्रस्तुत किए। “हर-हर महादेव”, “बोल बम”, “शिव शंकर भोलेनाथ” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। भक्ति संगीत की स्वर लहरियों से वातावरण अत्यंत दिव्य और भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु देर रात तक भजनों में झूमते रहे और पूरा क्षेत्र शिवमय हो गया। बाबा राजराजेश्वर पूजा समिति द्वारा आयोजन की समुचित व्यवस्था की गई थी। दर्शन के लिए पंक्तिबद्ध व्यवस्था, पेयजल, प्रसाद वितरण, साफ-सफाई एवं सुरक्षा की पर्याप्त तैयारी पहले से की गई थी। स्थानीय युवाओं एवं ग्रामीणों ने भी आयोजन में सक्रिय सहयोग दिया। युवा समाजसेवी अभिषेक सिंह ने बताया कि सावन माह के प्रत्येक सोमवार को विशेष पूजन कार्यक्रम होते हैं, लेकिन दूसरे सोमवार का आयोजन विशेष रूप से भव्य और ऐतिहासिक रहा। श्रद्धालुओं ने बाबा से क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि एवं वर्षा की कामना की। इस आयोजन से जहां धार्मिक आस्था मजबूत हुई, वहीं सामाजिक एकता एवं सांस्कृतिक समरसता की मिसाल भी प्रस्तुत हुई। बाबा राजराजेश्वर स्थान लगातार आस्था का केंद्र बनता जा रहा है और सावन में यहां की भक्ति चरम पर होती है।