पोषक तत्व युक्त भोजन से टीबी बीमारी जल्द होती है दूर

मरीजों को फूड बास्केट (पोषण पोटली) का वितरण
अमन श्रीवास्तव
The ujala times news
CEO
टीबी हारेगा देश जीतेगा का स्लोगन को सपना सच करने के लिए सदर अस्पताल की इमेजेंसी में मंगलवार को एक कैंप आयोजन किया गया.जिसमें स्वास्थ्य समिति के प्रबंधक प्रिंस कुमार, सिविल सर्जन प्रभार सह गैर संचारी रोग चिकित्सक डा फूल कुमार,सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉक्टर सचिन कुमार,सदर अस्पताल प्रबंधक कुमार नवनीत चंद्रा,एएनएम दीप्ति चंद्रा ,रोशन कुमार, डा संजय कुमार, डा यश शर्मा,शशि भूषण ,मो नौशाद एवं अन्य सदर अस्पताल के कर्मी ने
निक्षय मित्र (Nikshay Mitra) योजना के तहत टीबी मरीजों को फूड बास्केट (पोषण पोटली) का वितरण किया जा रहा है, जिसमें चावल, दाल, सरसों का तेल, अंडे और सोयाबीन जैसे प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ की समान मरीजों को बास्केट में दिए.वही इस संबंध में जानकारी देते हुए स्वास्थ्य समिति के प्रबंधक प्रिंस कुमार ने बताया कि उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है पोषण उन्होंने कहा कि चूंकि रोग के उपचार में पोषण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए टीबी मरीजों को मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है. इसके तहत पोषण के लिए मासिक सहायता राशि दोगुनी कर दी गई है.अब टीबी रोगियों के सभी घरेलू संपर्कों को प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत कवर किया जाएगा.उन्हें सामाजिक समर्थन दिया जाएगा.इस अभियान के तहत आज सदर अस्पताल में टीबी के मरीजों को एक बास्केट में पौष्टिक आहार दिया गया.और टीबी के मरीजों को 500 से 1000 रुपए तक टीबी के मरीजों के पौष्टिक आहार के लिए उन्हें मदद कर सकते है.बताया गया कि उपचार पूरा होने तक हर माह मिलेगा लाभ.बता दें कि निक्षय पोषण योजना भारत सरकार की एक योजना है. इसका उद्देश्य तपेदिक रोगियों को पोषण सहायता प्रदान करना है. बता दूं कि इस योजना के तहत टीबी के मरीजों को उपचार पूरा होने तक हर महीने 500 रुपए की वित्तीय प्रोत्साहन राशि दी जा रही है. यह राशि रोगियों को उनके पोषण की जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है.उपचार के दौरान उनकी ताकत बनाए रखने में सहायता करती है. जिसे अब बढ़ाकर 1000 रुपए कर दिया गया है.यह योजना टीबी के मरीजों के पोषण की जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है.यह टीबी के इलाज की सफलता दर को बढ़ाने में मदद करती है.निक्षय पोषण योजना का उद्देश्य् तपेदिक के खिलाफ टीबी रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना भी है.सरकार चाहती है कि योजना के जरिए तपेदिक के बोझ को कम किया जाए. वही गैर संचारी रोग डा फूल कुमार ने बताया कि यक्ष्मा टीबी रोग जानलेवा नहीं पर इलाज कराना बेहद जरूरी है.बढ़ जाने से जान की खतरा बनी रहती है.
क्या है लक्षण——-
किसी को लगातार बुखर रहता हो, अनवरत खांसी आती है और शरीर में थकान महसुस हो तो उसे टीबी की जांच करानी चाहिए. यह रोग छुआछूत का है। इसलिए इलाज कराना अनिवार्य है. जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांचकर व इलाज के साथ मुफ्त में दवा भी दी जाती है. वहीं गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ फूल कुमार ने बताया कि अब तक जिले में कुल 2000 नये टीबी रोगियों की खोज हुई है, वही 800 मरीज ठीक भी हुए है.वही लगभग चार गम्भीर जूझ रहे मरीज की मौत हुई है.वही उन्होंने बताया कि 2000 मरीजों का इलाज किया जा रहा है.प्राइवेट अस्पतालों को भी टीबी रोगियों के संबंध में जानकारी देने को कहा गया है.वहां भी जानकारी दिया जा रहा है.टीबी का लक्षण दिखते ही ऐसे मरीजों को तुरंत स्थानीय सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जांच कराना चाहिए.ताकि समय से इलाज हो सके.