Madhepura:25 मार्च से चैती छठ की शुरुआत हो रही है आज डालते सूर्य को प्रणाम कल सुबह का अरग

मधेपुरा\बिहार: छठ मनाया जाएगा बस स्टैंड पुल, भिरखी पुल, काली मन्दिर पुल और साहुगढ़ पुल और कुछ अपना अपना घर के छत पर मन रहे है .इसका महत्व बढ़ गया है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान राम ने चैती छठ के पर्व की शुरुआत की थी। आइए जानते हैं इस पर्व की तारीख, महत्व और शुभ योग…
चैती छठ और कार्तिक छठ साल के ये दो प्रमुख छठ पर्व हैं। कार्तिक मास के छठ के साथ शीत ऋतु का प्रभाव बढ़ने लगता है और चैती छठ के साथ ग्रीष्म ऋतु का प्रभाव बढ़ जाता है। इस तरह से देखें तो छठ पर्व ऋतु परिवर्तन से भी संबंधित पर्व है। ऋतुओं का परिवर्तन सूर्यदेव के कारण होता है। और सूर्य देव की कृपा से ही ऋतु अनुसार फसलों का उत्पादन होता है। इसलिए भारतीय परंपरा में कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि को छठ पर्व और चैत्र शुक्ल षष्ठी तिथि को छठ पर्व मनाने की परंपरा चली आ रही है। इनमें चैत मास की छठ का अपना विशेष महत्व है। हालांकि कार्तिक मास की छठ अधिक लोग करते हैं.
कार्तिक मास की छठ की सबसे खास बात यह है कि इस दौरान चैत्र नवरात्रि का पर्व और व्रत भी चल रहा होता है। चैती छठ की शुरुआत चैत्र शुक्ल चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से होती है। इस साल चैती छठ नहाय खाय 25 मार्च को होगा। 26 मार्च को छठ व्रती खरना करेंगे और 27 मार्च को छठ पर्व मनाया जाएगा। 27 मार्च को ही अस्त होते सूर्य को छठ पर्व का अर्घ्य दिया जाएगा। 28 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ पर्व का समापन हो जाएगा।
विदित हो कि चैती छठ पर बनने वाले शुभ योग
चैती छठ पर खरना दिन यानी 26 मार्च को कृतिका नक्षत्र होगा और साथ में प्रीति एवं रवियोग रहेगा.यानी आज 27 मार्च को आयुष्मान योग, रोहिणी नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग में अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा जबकि 28 मार्च को मृगशिरा नक्षत्र, सौभाग्य और सर्वार्थ सिद्धि योग में उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती पुण्य का लाभ पाएंगे।

