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OMG News: रेबीज का वायरस से हो सकता है जानलेवा बीमारी

बिहार: रेबीज बीमारी दशहरे की रोकथाम के बारे में समाज में जागरूकता फैलाना जरूरी है. रेबीज कुत्ते के काटने से ही नहीं बल्कि अन्य जानवरों के काटने से भी होने का खतरा होता है. यह वायरस फैलने वाला एक बेहद गंभीर रोग है. एक ऐसा वायरल इंफेक्शन है. जो आमतौर पर संकट में तो जानवरों के काटने से फैलता है. कुत्ते बिल्ली बंदर इत्यादि कई तरह के जानवरों के काटने से इस बीमारी के वायरस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है. रेबीज का वायरस पालतू जानवर के चाटने या खून का जानवर के लार से संपर्क में आने से भी फैलता है .रेबीज एक जानलेवा रोग है. जिसकी जानकारी बहुत देर में नजर आता है. अगर समय रहते इसका इलाज नहीं किया जाए तो ये रोग जानलेवा साबित हो सकता है.

72 घंटे के बाद नहीं होता है असर:

यदि किसी भी व्यक्ति को भी रेबीज संक्रमित किसी जानवर काट लिया है उसने 72 घंटे के भीतर अपना उपचार नही करवाया तो उसके बाद वैक्सीन या एआरवी का कोई फायदा नहीं होता है. इसलिए व्यक्ति के टीके अवश्य लगाएं .

लापरवाही ना बरतें:

कुत्ते बिल्ली या किसी अन्य जानवर के काटने पर बिल्कुल भी लापरवाही ना बरतें हल्का सा भी निशान है तो एंटी रैबीज इंजेक्शन जरूर लगाएं. रेबीज खतरनाक है. इसके बारे में लोगों की कम ही जानकारी है .और ज्यादा घातक साबित होता है. आप लोग मानते हैं कि कुत्तों के काटने से होता है मगर ऐसा नहीं है. कुत्ते बिल्ली बंदर के काटने से यह वायरस शरीर में फैलता है. अगर कोई जानवर काटे तो तत्काल चिकित्सक की सलाह जरूर लेना चाहिए.

किसी भी जानवर के काटने पर क्या करें:

सिविल सर्जन डॉक्टर अमरेन्द्र नारायण शाही ने बताया कि अगर रेबीज से संक्रमित किसी बंदर या कुत्ते आदि ने काट लिया तो तुरंत अपना इलाज करवाएं. काटे हुए स्थान को कम से कम 15 से 20 मिनट तक साबुन या डेटोल से साफ करते रहे. जितना जल्द हो सके व्यक्ति को एनआरवी के टीके लगाए पालतू कुत्ते या बिल्ली को इंजेक्शन जरूर लगवाएं.

किसी भी जानवर के काटने पर क्या ना करें:

सिविल सर्जन डॉक्टर मिथलेश ठाकुर ने कहा कि अगर रवि से शंकर में किसी भी कुत्ते या बंदर आदि के काटने पर इलाज में लापरवाही बिल्कुल ना बरतें. घाव अधिक हो तो उस पर टांके ना लगवाएं. रेबीज के संक्रमण से बचने के लिए कुत्ते व बंदरों अधिक से अधिक संपर्क में ना जाए.

क्या है रेबीज के लक्ष्ण:

सिविल सर्जन ने बताया कि बुखार सिरदर्द घबराहट बेचैनी व्याकुलता भ्रम की स्थिति खाना-पीना निगलने में कठिनाई बहुत अधिक लाभ निकलना पानी से डर लगना नींद नहीं आना एवं शरीर में किसी एक अंग से पैरालिसिस यानी लकवा मार देना रेबीज के लक्षण है.

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