Madhepura: दिन प्रतिदिन सदर अस्पताल में बिचौलियों की हावी बढ़ती जा रही है लेकिन सदर अस्पताल प्रशासन है बेखबर - The Ujala Times News
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Madhepura: दिन प्रतिदिन सदर अस्पताल में बिचौलियों की हावी बढ़ती जा रही है लेकिन सदर अस्पताल प्रशासन है बेखबर

Bihar / Madhepura : जिले की लगभग पांच लाख लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने की जिम्मेदारी संभालने वाला सदर अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण लूट का अड्डा बन गया है. इसके कारण वर्तमान में सदर अस्पताल बिचौलियों का चारा का बनता जा रहा है सदर अस्पताल में सक्रिय बिचोली अस्पताल कर्मी व कई चिकित्सक को खासम खास बने हुए हैं .यही वजह है कि इन बिचोलियो पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हो रही है बिचौलिए के माध्यम से प्रतिदिन दर्जनों मरीज को बरगला कर निजी क्लीनिक पर ले जाया जाता है इन बिचोली में जहां कुछ झोला छाप चिकित्सक शामिल है तो कुछ सदर अस्पताल में कार्यरत कर्मी मरीज पहुंचाने के एवज में इन बिचौलियों को कमीशन के तौर पर मोटी रकम अदा की जाती है .अस्पताल कर्मियों के इस खेल में गरीब तथा असहाय मरीजों का जमकर आर्थिक शोषण किया जाता है .जबकि स्वास्थ विभाग एवम जिला प्रशासन इस मामले में उदासीन बनी हुई है जिसके कारण मरीजों के शोषण का यह धंधा काफी फल-फूल रहा है और इस खेल में शामिल अस्पताल कर्मी की चांदी कट रही है बिचौलियों के निशाने पर रहते हैं बड़े बड़े पदाधिकारियों की अनदेखी का ही नतीजा है कि अस्पताल में सक्रिय बिचोलिए यहां पहुंचने वाले मरीज व उनके परिजन को बहला फुसलाकर अपने साथ ले जाते हैं और उनका वहां जमकर शोषण किया जाता है .इन बिचौलिए के निशाने पर खासकर भोले- भाले व ग्रामीण क्षेत्र के गरीब मरीज होते हैं जिन्हें अस्पताल के बारे में खास तरह से जानकारी नहीं होती है. जिसका फायदा उठाकर अस्पताल कर्मियों की मदद से भी ले जाते हैं.मूकदर्शक बनी है अस्पताल प्रशासन दलालो की पहचान के लिए सदर अस्पताल के मुख्य द्वार पर सीसीटीवी कैमरा लगाया गया लेकिन सदर अस्पताल में सीसीटीवी कैमरा रहने के बावजूद भी दलालों की पहचान नहीं की जा रही है.वही सूत्रों से जानकारी मिली है कि अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों टारगेट बना लेते हैं अस्पताल कर्मियों की मदद से मरीज को अस्पताल में व्यवस्था के बारे में समझाया जाता है और बेहतर इलाज के नाम पर उन्हें अस्पताल से बाहर किसी निजी क्लीनिक ले जाया जाता है मालूम हो कि बिचौलियों के साथ-साथ चिकित्सकों को भी रहता है कमीशन इस कारण यह है कि जिन मरीजों को अस्पताल में सलाह दी जाती है की नॉर्मल डिलीवरी हो जाएगी उन्हें भी बहला फुसलाकर अपने साथ ले जाते है और पेट खुलाकर ऑपरेशन करा दिये जाते है.तब जाकर खेल शुरू होता है जिसमें सभी का हिस्सा आता है कि किसको कितना देना है .कई बार ऐसी मामले को अखबार के माध्यम से पर्दा फास किया गया लेकिन अनदेखी कर रही है सदर अस्पताल प्रशासन.

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