Madhepura: गर्मी बढ़ते ही अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा, डिहाइड्रेशन के ज्यादातर मरीज - The Ujala Times News
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Madhepura: गर्मी बढ़ते ही अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा, डिहाइड्रेशन के ज्यादातर मरीज

गर्मी बढ़ने के साथ सदर अस्पताल में उमड़ी मरीजों की भीड़

मधेपुरा/बिहार: गर्मी बढ़ने के साथ ही लोग बीमारियों का शिकार होने लगे हैं लोग

सदर अस्पताल इलाज कराने पहुंचे मरीज

भीषण गर्मी का सीधा असर लोगों के शरीर पर पड़ रहा है. गर्मी बढ़ते ही सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा होने लगा है. अस्पताल में चाहे दवा वितरण काउंटर हो या फिर डाक्टर का कक्ष, सभी जगह भीड़ बढ़ने से मरीजों को इलाज कराने में परेशानी उठानी पड़ रही है.सदर अस्पताल में ज्यादातर मरीज उल्टी-दस्त,बुखार और पेट दर्द के पहुंच रहे हैं.बहरहाल लोग बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं। इस दौरान पर्ची बनवाने के लिए सुबह ही काउंटर पर लंबी लाइन लग रही है. वहीं ओपीडी में डॉक्टरों के कमरों के सामने भी मरीजों की भीड़ देखी जा रही है.इस दौरान दवाई लेने वाले काउंटर से लेकर पैथोलॉजी लैब पर भी मरीजों को घंटों खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते देखा जा रहा है.फिलहाल मौसम बदल रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ ही लोग बीमार हो रहे है। बताया कि इस मौसम में बच्चों की देखभाल जरूरी है।

गर्मी में बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है :

अस्पताल में पिछले 20 दिन में लगातार पेट दर्द के मरीजों की संख्या बढ़ गई है.चिकित्सकों की माने तो डायरिया एक जल जनित बीमारी है. गर्मी बढ़ते ही लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए कहीं से भी पानी खरीदकर पीना शुरू कर देते हैं. इसके अलावा टैंकरों व सप्लाई का पानी भी कई बार खराब आ जाता है.इसलिए लोगों को इस मौसम में हमेशा साफ पानी या पानी को उबाल कर ही पीना चाहिए. गर्मी में बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है.बच्चे दूषित पानी या फिर अन्य चीज खा लेते हैं। साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए.गर्मी से बचाव के लिए बच्चे का ख्याल रखना चाहिए.जैसे ही उल्टी,सिरदर्द आदि के लक्षण दिखे,तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.

बच्चे हो रहे ज्यादा बीमार :

बढ़ती उमस और गर्मी के कारण उल्टी दस्त,बुखार,पेट में दर्द,सांस की बीमारी आदि रोग बच्चों में हो रहे हैं. ज्यादातर बच्चे उल्टी दस्त के अलावा वायरल फीवर से भी परेशान हो रहे हैं. रोजाना एक दर्जन से अधिक बच्चे सरकारी अस्पताल में गर्मी से होने वाली बीमारी से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं। इसके अलावा प्राइवेट अस्पतालों में भी मरीज उपचार करा रहे हैं.

तेज धूप व उमस ने अस्पताल में बढ़ाई मरीजों की संख्या:

तेज धूप व उमस बढ़ते ही जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ गयी है.पर्ची काउंटर पर मरीजों की लंबी लाइन लग रही है. वहीं ओपीडी में सुबह नौ बजे से दो बजे तक मरीज सहित परिजन डटे रहते है.फिर उसके बाद शाम चार से छह में भी मरीजों की लंबी कतार दिखने को मिलता है. गर्मी बढ़ते ही लोगों में डी-हाईड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ गयी है.सदर अस्पताल में मरीज डिहाईड्रेसन से ग्रसित होने कर इलाज करा रहे हैं. पानी की कमी के चलते लगातार अस्पताल में भी मरीजों की संख्या बढ़ रही है.डी हाइड्रेशन की शिकायत विशेष कर फील्ड में रहकर काम करने वालों में देखी जा रही है. मेडिकल स्टाफ के अनुसार डी हाईड्रेशन के मरीज तेजी से बढ़ रहे है.स्वास्थ्य विभाग भी लोगों को इससे बचने के उपाय बता रहा है. चिकित्सकों का कहना है मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा है. मौसम के अनुरूप होने में कम से कम 20 दिन का समय लगता है,लेकिन अभी की स्थिति में जिस गति से गर्मी बढ़ी है शरीर उस अनुरूप नहीं हो पाया है तथा डी-हाईड्रेशन की शिकायत बढ़ गयी है. सदर अस्पताल में लगातार डी हाईड्रेशन से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं। विभाग की ओर से लगातार बढ़ती गर्मी तथा डीहाईड्रेशन की शिकायत को देखते स्वास्थ्य विभाग ने सभी को ओआरएस घोल के अलावा आवश्यक दवाईयां उपलब्ध करा रहे है.डॉक्टर अनुज कुमार ने बताया कि गर्मी बढ़ने के कारण डिहाईड्रेशन व बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है. इससे बचाव के लिए सावधानी बरतने की जरूरत है. जिससे डिहाईड्रेशन सहित अन्य बीमारियों से बच सकते है.

डिहाईड्रेशन में न बरते लापरवाही :

गर्मी ज्यादा होने के कारण हमारें शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी होने लगती है.विशेष कर धूप में जाने पर जिस भाग में धूप पड़ता है वहां से सीधे पानी बिना पसीना निकले सूखने लगता है. जिससे हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता तो कम होती ही है,इसके साथ ही शरीर में जितने भी आर्गन हैं वे भी प्रभावित हो जाते हैं। ऐसे में थकावट तथा शरीर कमजोर होने लगता है. चिकित्सकों के अनुसार डिहाईड्रेशन होने पर लापरवाहीं नहीं बरतना चाहिए. जिससे जान भी जा सकती है. इसलिए तत्काल चिकित्सकों से सुझाव लेकर हीं दवाएं ले

ये होते हैं मरीजों में लक्षण :

डिहाईड्रेशन तथा सन स्ट्रोक अर्थात ताप घात में शरीर का पानी तेजी से सुखने लगता है. इससे शरीर में थकावट तथा सुस्ती आने लगती है। जिससे मुंह भी सूखने लगता है। इसका प्रभाव बढ़ने पर चक्कर, बेहोशी,बुखार,सिरदर्द,उल्टी होने के साथ साथ प्रभावित व्यक्ति बहकी बहकी बातें भी करने लगता है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर मरीज की मौत भी हो सकती है.इस तरह के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकों से संपर्क करें

बच्चों को देखभाल करना ज्यादा जरूरी :

डा यश शर्मा ने बताया कि सन स्ट्रोक या डिहाईड्रेशन के प्रभाव से बचाने के लिए बच्चों की देखभाल करना ज्यादा जरूरी है. अधिकांश बच्चे छुट्टी के चलते धूप में खेलने चले जाते हैं. इससे बच्चे कपड़े भी नहीं पहने रहते,जिससे उनका धूप से बचाव हो सके. बच्चों के शरीर का क्षेत्रफल भी काफी कम होता है जिससे वे धूप से शीघ्र प्रभावित हो जाते हैं तथा उनकी स्थिति काफी नाजुक बनी रहती है. इस दौरान लापरवहीं बरतने पर बीमारी जानलेवा हीं साबित हो सकती है.

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