मातृ शिशु मृत्यु में कमी लाने में परिवार नियोजन अहम–सिविल सर्जन

परिवार नियोजन साधनो पर लोगों को जागरूक करने के मकसद से स्वास्थ विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है. जिला में सामुदायिक स्तर पर कई जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं. हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर सब सेंटर व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात परिवार नियोजन काउंसलर एवं एएनएम को प्रोजेक्टर के माध्यम से एक दिवसीय काउंसिल प्रशिक्षण दिया गया.ब्लॉक की बारे में प्रशिक्षण में भाग लिया. इस विषय पर सिविल सर्जन डॉ अब्दुश सलाम ने बताया कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए परिवार नियोजन की अहम भूमिका है. इस को अपनाकर कम उम्र में गर्भवस्था वह अंतराल पर गर्भवती होने से बच्चों में जोखिम व खतरा बने एनीमिया के कारण गर्भवस्था में होने वाली जटिलता से बचा जा सकता है.
निम्न बातों पर ध्यान देना बहुत ही अति आवश्यक:
सिविल सर्जन डॉ अब्दुश सलाम ने कहा कि शादी 18 साल के बाद पहला बच्चा 20 साल के बाद दूसरा बच्चा इसके बाद और बध्याकरण कम से कम 22 साल के बाद कराना चाहिए.महिला को प्रेरित करना चाहिए कि वह अपने बच्चों एवं परिवार के भविष्य के बारे में सोचें और इस पर अपने पति से चर्चा करें तथा उन्हें यह बताएं कि कैसे अपने बच्चों के बारे में सोचा जाए ताकि परिवार में क्या सुख सुविधा की चीज हो सके तथा जितना छोटा परिवार उतना सुखी परिवार माना जाता है सिविल सर्जन डॉ अब्दुश सलाम ने बताया कि बार-बार मां बनने से महिलाओं में खून की कमी हो सकती है.हड्डी कमजोर हो सकती है. कमजोरी के कारण मां की जान को खतरा भी हो सकता है आने वाला बच्चा समय-समय से पहले जन्म ले सकता है कमजोर हो सकता है या मर भी सकता है.दोबारा गर्भवती होने पर दूध भी काम हो सकता है जिससे पहले बच्चों को सही पोषण नहीं मिल पाता है जिस कारण बच्चों को मानसिक और शारीरिक विकास कम हो जाता है और जीवनभर मानसिक रूप से बच्चे कमजोर हो जाते हैं.
