मिर्गी के मरीजों का सही समय पर इलाज है अति आवश्यक चिकित्सक की सलाह के बिना ना ले कोई दवाई - The Ujala Times News
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मिर्गी के मरीजों का सही समय पर इलाज है अति आवश्यक चिकित्सक की सलाह के बिना ना ले कोई दवाई

आमजनो को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष नवंबर के महीने में राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है .लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण इस वर्ष ये दिवस नही मनाया गया.वही इस दौरान स्वास्थ्य संस्थानों पर आने वाले मरीजों व परिजनों की मिर्गी रोग से बचाव व उपचार के बारे में जानकारी दी जाती है.केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से आमजनों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है. मिर्गी के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है कि उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए किसी व्यक्ति के मिर्गी से पीड़ित होने के बारे में जैसे ही जानकारी प्राप्त हो वैसे ही तुरंत उपचार शुरू कर देनी चाहिए. समय पर उपचार आगे बिगड़ती स्थिति को रोकता है. पीड़ित रोगियों को चिकित्सक की सलाह के अनुसार नियमित रूप से दवाओं का सेवन करना चाहिए. यदि उन्हें दौरा नहीं भी पड़ता तो भी उन्हें चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवाओं का सेवन जरूर करना चाहिए.रोगियों को अपने चिकित्सक की सलाह के बिना दवाओं का सेवन बंद नहीं करना चाहिए. मिर्गी से पीड़ित रोगियों को किसी भी तरह की अन्य दवाओं का सेवन करते समय दवाओं के संभावित दुष्प्रभाव या किसी भी तरह के अन्य जटिलताओं से बचने के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए .शराब का सेवन नहीं करें शराब का सेवन दौरा पड़ने की संभावना को विकसित करता है

जागरूकता है बेहद जरूरी सिविल सर्जन प्रभार डॉ आरपी रमण ने कहा कि मिर्गी से पीड़ित मरीजों का सामाजिक बहिष्कार नहीं किया जाना चाहिए. गलत जानकारियों के कारण सैकड़ों मरीज कष्ट भोग रहे हैं .जागरूक की कमी से जुड़ी जटिलताओं को बढ़ा दी है उन्होंने कहा कि मिर्गी दिवस मुख्य उद्देश्य रोगियों की परेशानियों को लेकर उन्हें बेहतर उपचार उपलब्ध कराना है.बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता लाना बेहद जरूरी है.मिर्गी को लेकर लोगों में तरह-तरह की भ्रातियों के कारण समय उपचार नहीं मिल पाता है.भ्रातियों की वजह से मिर्गी का मरीज मौत के शिकार भी हो जाते हैं.

क्या है लक्षण

अचानक लड़खाना/ फड़कन (हाथ- पांव में अनियंत्रित झटके आना)

बेहोशी आना

हाथ या पैर में सनसनी (पिन या सुई चुभने का एहसास होना या महसूस होना)

हाथ व पैरों या चेहरों की मांसपेशियों में जकड़न

मिर्गी के कारण
मस्तिष्क की क्षति जैसे जन्मपूर्व एवं प्रसवकालीन चोट.

जन्मजात असमान्यता.

मस्तिष्क में संक्रमण स्त्रोत एवं ब्रेन ट्यूमर

सिर में चोट/ दुर्घटना.

बचपन में लंबे समय तक तेज बुखार से पीड़ित होना

इन बातों पर दे विशेष रूप से ध्यान

मरीज घबराएं नहीं

पीड़ित व्यक्ति को दौरे के दौरान नियंत्रित करने की कोशिश न करें.

पीड़ित व्यक्ति के आसपास से तेज वस्तुओं या अन्य हानिकारक पर्दाथों को दूर रखें.

यदि पीड़ित व्यक्ति न गर्दन कसकर रखने वाले कपड़े पहन न रखें है तो तुरंत ढ़ीला करें.

पीड़ित व्यक्ति को एक ओर मोड़कर लिटाएं ताकि पीड़ित व्यक्ति के मुंह से निकलने वाला किसी भी तरह का तरल पर्दाथों सुरक्षित रूप से बाहर आ सकें.

पीड़ित व्यक्ति के सिर के नीचे कुछ आरामदायक वस्तुएं रखें.

पीड़ित व्यक्ति की जीभ बाहर निकलने के डर से मुंह में कुछ न डालें.

जब तक चिकित्सा सहायता प्राप्त ना हो तब तक पीड़ित व्यक्ति के साथ रहे.

पीड़ित व्यक्ति को आराम करने या सोने दे.

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