मधेपुरा:भविष्य संवारने के लिए रोज पटरी पार कर स्कूल जाना मजबूरी

मधेपुरा/बिहार: पटरी के दूसरी ओर स्थित स्टेशन चौक के समीप एक प्राथमिक विद्यालय है जहां छोटे-छोटे बच्चों को रोजाना जान हथेली पर लेकर पटरी पार करके स्कूल आना पड़ता है. शनिवार को स्कूल में छुट्टियां के बाद छोटे छोटे बच्चें रेलवे पटरी के दूसरी ओर पटरी पार कर जा रहे थे. जहां बच्चो की जान खतरे में बनी रहती है.कई तरह की दुर्घटना की आशंका भी जताई जा सकती है.स्थानीय निवासी आनंद बताते है कि
दूरी से बचने के लिए बच्चे घर के सामने से ही पटरी पार करना ज्यादा सुविधाजनक समझते हैं. इस कारण वे रोज इसी शार्टकट को अपनाते हैं. जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है.वही बच्चे ने बताया कि फेरा लगाने से बच जाते हैं सरकारी स्कूल के इन विद्यार्थियों ने बताया कि स्कूल से घर उस पार है जो दूरी पर है.पटरी पार कर जल्दी घर पहुँच जाते है.बच्चे ने बताया कि वे दोनों तरफ ट्रैन देखकर फिर एक साथ जल्दी जल्दी पटरी पार करते हैं.वही वहां के स्थानीय निवासी चंदन बताते है कि बच्चे रेलवे पार कर इस लिए जाते है क्योंकि इससे उनका समय बचता है.ऐसे में रेलवे प्रशासन को सख्त या चेत होने की जरूरत है.

जिससे किसी तरह की दुर्घटना घटित न हो.स्थानीय निवासी संजीव बताते है कि विद्यालय के शिक्षक को भी ध्यान देना चाहिए कि बच्चे घर किस ओर से जाते है ऐसा नही है कि शिक्षक को यह बात मालूम नही होगा कि बच्चे पटरी पार कर घर जाते है.
स्थानीय निवासी घनश्याम बताते है की पटरी के उस पार वर्ग पांच तक ही विद्यालय है.इस कारण बच्चे पटरी के उस पार से इधर आते है अभिभावकों की भी गलती है छोटे छोटे बच्चो को खुद से लेने आना चाहिए.
