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Madhepura: विकास की बात, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम से होगी जलनिकासी, सड़क पर बह रही गंदा पानी

- ड्रेनेज सिस्टम का रिवाइज डीपीआर 144 करोड़ का बना है-
मधेपुरा/बिहार: नगर क्षेत्र में नाली तो बहुत निर्माण हुआ. लेकिन जल निकासी की व्यवस्था के अभाव में अधिकांश नाला मच्छर पालन केंद्र बन गया है. बिना मास्टर प्लान के बने नाले अपने मोहल्ले का पानी निकालने में अक्षम है. वही कई जगहों पर नाले की कनेक्टिविटी दूसरे नाले से नहीं रहने के कारण भी जलजमाव हो रहा है. ऐसे में मधेपुरा शहर को एक संपूर्ण ड्रेनेज सिस्टम की आवश्यकता है ताकि जलजमाव की समस्या खत्म हो नालों से पानी निकासी सुनिश्चित हो.
- जलजमाव से एक जमाने में पूरी तरह मुक्त था मधेपुरा, बढ़ती गई नालियों की संख्या होता रहा अतिक्रमण बढ़ गई जलजमाव की समस्या-
मधेपुरा के पुराने बुजुर्ग नागरिक बताते हैं तीनो तरफ नदियां होने की वजह से मधेपुरा शहर में कभी जलजमाव नहीं होता था. नब्बे के दशक में मुख्य बाजार में बनी नाली से पर्याप्त जल निकासी भी हो जाती थी. जिस नालियों का बगैर लेवल देखें निर्माण होता गया जलजमाव की समस्या बढ़ती गई. हालात यहां तक हो गए की निजी मंशा से ऐसी नालियां भी बनाई गई जो आगे कहीं से भी कनेक्ट नहीं है.
-राज्य सरकार से लेकर विभिन्न मदों में मिलती है राशि-
सरकार एवं अन्य व्यवस्था द्वारा विकास कार्यो के लिए राशि जारी की जाती है. जिससे की वार्ड में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा सके पर मधेपुरा में नगर के 26 वार्डो में न तो ढंग की सड़कें है न ही नालियाँ न स्ट्रीट लाइट की बेहतर व्यवस्था ऐसे में प्रश्न उठना लाजमी हो जाता है कि शासन द्वारा दी गयी निधि का उपयोग आखिर कहां किया जा रहा है .
-जनता की चुप्पी भी है बदहाली की बड़ी वजह-
विकास की राशि की अफरा तफरी की बात सर्व विदित है पर इसके खिलाफ आवाज न उठना बदहाली का प्रमुख कारण है. जनता कभी न तो अपने पार्षदों से न नगर सरकार के प्रमुखों से विकास निधि का हिसाब मांगती है न उनके बढ़ते आर्थिक संसाधनो पर प्रश्न पूछती है. जनता की इस चुप्पी का सभी खुलकर लाभ उठाते है .
-खास स्थानों पर जगमगा रही स्ट्रीट लाइट, आम रास्तो पर है अँधेरा पसरा –
हालात यह है कि गलियों में जगह-जगह नाले का ढक्कन टूटा हुआ है अंधेरा छाया हुआ है. लेकिन मुख्य सड़क के अलावा कई खास जगह पर स्ट्रीट लाइट जगमगा रही है.
-क्या कहते है नगरवासी-
… मधेपुरा शहर में पहले कभी जलजमाव नहीं होता था. 1980 के आस-पास कई बार भीषण वर्षा हुई थी. लेकिन सारा पानी बहकर नदियों के माध्यम से निकल जाता रहा. कभी भी जल निकासी की समस्या नहीं रही. लेकिन नाले बनते रहें और समस्या बढ़ती गई.पूर्व में कॉलेज चौक के आसपास का जल निकासी टीपी कॉलेज के बगल से बेलघाट हो जाता था. जबकि कचहरी के आसपास मुख्य बाजार की जल निकासी डाक बंगला रोड होकर तत्कालीन बांध वर्तमान में पश्चिमी बाईपास के बगल से होते हुए नदी में होता था. इसी नदी में भिरखी की भी जल निकासी होती थी. वही जयपाल पट्टी एवं उस इलाके की जल निकासी रेलवे पुल के माध्यम से नदी में होती थी.हर वार्ड में भी अधिकांश जगह नाला टूटे अवस्था में है तो कहीं नालों का पानी सड़कों पर रहता है. उन्होंने बताया कि शहर के भुपेंद्र चौक से सुभाष चौक तक सभी जगहों पर नगर परिषद के द्वारा लोगों के लिए सुरक्षा का इंतजाम किए बिना हीं नाला के प्लेट को तोड़कर खुले छोड़ दिया गया है. वही कहीं नाले का पानी सड़क पर जमा हो गया है तो कहीं नाला क्षतिग्रस्त पड़ा है. वार्डोंं में नाला का गंदगी भरा पानी सड़कों पर महीनों से रहने के कारण उससे लोगोें के बीमार होने का खतरा अलग सता रहा है. नगर परिषद के अधिकारियों का कहना है कि अभी बोर्ड गठन नहीं होने से भी परेशानी हो रही है. नाला से होने वाले जलजमाव के परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. - स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम का रिवाइज डीपीआर 144 करोड़ का बना है जो 6 माह पूर्व विभाग को भेजा जा चुका है. एमडी स्तर पर समीक्षा की जा रही है. इसके बाद आगे कार्रवाई होगी. चार वर्ष पूर्व भी डीपीआर बना था. पुराने डीपीआर में शहर के कई हिस्से छूट गए थे. वह डीपीआर 77-78 करोड़ का था. विभाग के अनुमोदन एवं राशि मिलने के बाद कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा .
- दिनेश कुमार दास, जेई, नगर परिषद मधेपुरा
