Madhepura: वाहनों के धुएं से जहरीली हो रही हवा - The Ujala Times News
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Madhepura: वाहनों के धुएं से जहरीली हो रही हवा

मधेपुरा/बिहार: सड़कों पर दौड़ रहे पुराने व कंडम वाहनों से निकलने वाले धुएं से शहर की हवा तेजी से जहरीली हो रही है.इन वाहनों के धुएं से निकलने वाली कार्बनडाई ऑक्साइड, सल्फरडाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी घातक गैस व लैरोसेल जैसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक कणों की मात्रा शहर की हवा में खतरनाक स्तर के आंकड़े को पार कर गए हैं. सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉक्टर मिथिलेश बताते हैं कि शहर में चल रहे ऐसे मोटरसाइकिल या कोई भी वाहन से निकलती जहरीले धुंए से कई तरह के फेफड़ो या यकृत संबंधित बीमारी हो सकती है यह बीमारी बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक को हो सकती है.सांस लेने में दिक्कत हो सकती है.बुद्धिजीवी वर्ग क्षेत्र के लोगों की माने तो गंभीर बात यह है कि शहर की हवा को विषाक्त बना रहे कंडम वाहनों पर रोक लगाने के लिए आरटीओ, ट्रैफिक पुलिस व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गंभीर नहीं है.

शहर में कई वाहन से जहरीली धुंआ लोगो को सांस लेने में हो रही तकलीफ इनमें से सौ से ज्यादा वाहन पुराने मॉडल के होकर काला धुआं छोड़ रहे हैं. इसके अलावा पुराने मॉडल के फोर व्हीलर, लोडिंग वाहन व दोपहिया वाहन भी समस्या को बढ़ा रहे हैं. शहर में वायु प्रदूषण को लेकर जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आंकड़े जुटाए तो तथ्य सामने आए कि तीन किलोमीटर का प्रदूषित एरिया हर साल सौ से अधिक लोगों को सांस रोगों का शिकार बना रहा है.

विगत कई साल से नहीं हुई चेकिंग:

चार पहिया व दो पहिया वाहनों से निकल रहे काले धुएं की जांच के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, ट्रैफिक पुलिस व परिवहन विभाग ने दो साल में कोई अभियान नहीं चलाया.कार्रवाई की बात तो बहुत दूर है

ऐसे रोका जा सकता है वायु प्रदूषण:

ऑफ रोड वाहनों के संचालन की समय-समय पर जांच की जाना चाहिए.ताकि वह शहर में काला धुआं नहीं फैला सकें.

प्रत्येक वाहन पर प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की एनओसी अनिवार्य की जाए.

शहर सहित अन्य क्षेत्रों के प्रत्येक पेट्रोलपंप पर वाहनों के प्रदूषण मापने की व्यवस्था हो.

कंडम वाहनों पर सख्ती से कार्रवाई कर हटवाया जाए.

लेड की मिलावट से निकल रहे एरोसोल कण :

पेट्रोल में लेड की मिलावट के कारण धुएं के माध्यम से एरोसोल के कण निकल रहे हैं.मानकों पर गौर करें तो मानव स्वास्थ्य के लिए 0.002 एमएम तक एरोसोल कण नुकसानदायी नहीं होते है.

शहर की सड़कों पर फर्राटा भर रहे ऑटो रिक्शा व मोटरसाइकिल से निकलता काला धुआं

कंडम वाहनों पर लगे सख्ती से रोक:

शहर में पिछले दस वर्षों में यात्री व लोडिंग वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है. साथ ही कंडम वाहनों का उपयोग भी बढ़ा है. शहर की बसाहट एरिया कम व वाहनों की संख्या अधिक होने से भी हवा में खतरनाक गैसों का स्तर बढ़ रहा है. हवा में कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड व सल्फर डाई ऑक्साइड के साथ-साथ कई प्रकार के अम्ल की घुलनशीलता बढ़ी है. इससे लोगों को सांस से संबंधित रोगों का खतरा भी बढ़ रहा है.

शहर की हवा में खतरनाक गैसों का स्तर

गैस का नाम सामान्य हवा में प्रतिशत

कार्बन मोनोऑक्साइड 120300,कार्बनडाई ऑक्साइड 0.00007 0.0008,सल्फरडाई ऑक्साइड 0.0007 0.027,नाइट्रोजन ऑक्साइड 15003140

नोट: शहर की हवा में गैसों की माप पीपीएम में है.

पुराने वाहन नहीं चलने चाहिए

फोर व्हीलर (डीजल),आठ साल,फोर व्हीलर (पेट्रोल)12 साल,हेवी लोडेड वाहन,आठ साल,ऑटो रिक्शा,आठ साल,टू व्हीलर (स्कूटर),10 साल,बाइक,10 साल

शहर में पांच प्रदूषण जांच केंद्र लेकिन वाहनों से निकलने वाले धुएं की जांच कराने नहीं जाते लोग .

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