Madepura:आहार में पोषक तत्वों की कमी को कैसे दूर सही पोषण से भी बेहतर स्वास्थ्य का तोहफा - The Ujala Times News
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Madepura:आहार में पोषक तत्वों की कमी को कैसे दूर सही पोषण से भी बेहतर स्वास्थ्य का तोहफा

किशोर किशोरियों के स्वास्थ्य की देखभाल जरूरी —-सिविल सर्जन

मौसम के उलटफेर पर होने वाले स्वास्थ्य समस्याएं किशोर किशोरियों के लिए भी उतनी ही चुनौतीपूर्ण है . ज्यादातर घर में रहने से व शारीरिक गतिविधियों से दूर और कंप्यूटर और मोबाइल गेम्स में उलझ कर रह गए हैं .ऐसे में मौसम के वजह से होने वाले रोग उनके शाररिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है.इसलिए इनके स्वास्थ्य की जरूरतों को नजर अंदाज नहीं करें. अन्यथा समय रहते उन पर ध्यान ना देना कहीं उनके नुकसान का कारण न बन जाए.

किशोर व्यवस्था में सही पोषण द्वारा बेहतर स्वास्थ्य का तोहफा

सिविल सर्जन डॉ अब्दुश सलाम ने कहा कि संपूर्ण शारीरिक मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए किशोर व्यवस्था बहुत महत्वपूर्ण समय होता है. इसलिए इस दौरान किशोरियों को सही पोषण द्वारा एनीमिया और अन्य दूसरे लोगों से बचाना जरूरी है. विशेषकर किशोरियों में प्रत्येक माह होने वाले मासिक चक्र के कारण खून की कमी से होने वाली कमजोरियों को दूर करने के लिए उनके आहार में पोषक तत्वों को शामिल करें इसलिए किशोरियों को आयरन युक्त आहार देने की आवश्यकता है. बढ़ते बच्चे के आहार में विटामिन कैल्शियम और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व की अनदेखी नहीं करें प्रत्येक का अपना अलग-अलग फायदा होता है. इसलिए दाल ,हरी सब्जियां ,गाजर, गोभी ,दूध दही, चना, गुड़, मौसमी फल, टमाटर बादाम, सूरजमुखी के बीज पीनट बटर और पपीता आदि को उनके भोजन में जरूर दें विटामिन सी के लिए खट्टे फल खाना लाभकारी है इससे प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होता है और कोणासन कर मन के संभावना भी कम हो जाती है.

मित्रता व्यवहार कर उनको मानसिक तनाव से दूर रखें:

सिविल सर्जन अब्दुश सलाम ने बताया कि लगातार ऑनलाइन कक्षा और दोस्ती से सर्वाधिक दूरी से किशोरों में मानसिक तनाव बढ़ सकता है इसलिए उनके व्यवहार पर नजर रखें यदि कुछ असामान्य नजर आए जैसे समय पर नींद ना आना और देर रात तक जगना बेवजह गुस्सा करना चिरचिरापन घर पर पढ़ाई के दौरान एकाग्रता में बाधा अत्यधिक चिंता वह उदासी या कभी-कभी बिस्तर गिला हो जाना तो तुरंत उनके समस्याओं को समझें उनसे अभिभावक नहीं बल्कि दोस्त बन कर बात करें. जिससे वह तनाव की स्थिति से बाहर निकल सके उनके साथ समय बिताएं योग्य और ध्यान की तरफ उनकी रुचि बनाने की कोशिश करें. इससे उनको सकरात्मक ऊर्जा मिलेगी और व तनाव से निकल पाएंगे. सभी बच्चे और किशोर तनाव को लेकर एक ही तरह से प्रतिक्रिया नहीं देते हैं. कुछ बच्चों में सामान्य परिवर्तन ही देखने को मिलता है. जबकि कुछ में काफी गंभीर तरह से बदलाव आ सकता है. इसलिए अभिभावकों को सतर्क होकर अवलोकन करना जरूरी है. संभव हो तो उनसे क्लासेस के बाद कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल से दूरी रखें जिससे कि उनकी आंखों भी सुरक्षित रह सके.

इन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखें

अपने नाक आंख एवं मुंह को छूने से बचें हाथों में नियमित रूप से साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें

तंबाकू सैनी आदि का प्रयोग नहीं करें ना ही सार्वजनिक स्थानों पर थूके.

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