जिले के इतनी बड़ी अस्पताल में नहीं है सीटी स्कैन की सुविधा रोजाना दर्जनों गम्भीर मरीज को किया जाता हायर सेंटर रेफर रास्ते मे कई लोग की जाती है जान

सदर अस्पताल में व्यवस्था के नाम पर किया जाता है सिर्फ एक्स-रे ,आईसीयू बाकी व्यवस्था साहबो के अलमारी में बंद
जहां एक तरफ स्वास्थ्य विभाग में सब कुछ अच्छा दिख रही है वहीं दूसरी ओर जिले की इतनी बड़ी अस्पताल में सिटी स्कैन की सुविधा नही रहने कारण आमदिनों गरीब व असहाय मरीज को घटना या अन्य किसी दुर्घटना में सिर में चोट लगने के कारण किया जाता है हायर सेंटर रेफर.
सदर अस्पताल में सिटी स्कैन की सुविधा नही रहने के कारण गंभीर मरीजों का इलाज कराने में काफी परेशानी होती है.जानकारी देते हुए बता दे कि सिटी स्कैन में कम से 5000 रुपए अधिकतम 150000 लाख के करीब खर्च होता है. वही स्वास्थ्य विभाग की ओर से बहुत सी सुख सुविधा मरीजों को उपलब्ध कराया गया है.लेकिन कुछ उपकरण रहने के बाबजूद भी अब तक सफलता नहीं मिली है. सदर अस्पताल में मिली जानकारी के अनुसार प्रतिमाह औषत एक सौ से अधिक मरीजों को पीएमसीएच या डीएमसीएच रेफर किया जाता है .खासकर कोई बड़ी घटना या दुर्घटना होने पर अस्पताल में मरीजों का उचित इलाज नहीं हो पा रहा है.जब मरीजों को सदर अस्पताल से हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है तो कभी कभी यह आलम होता कि मरीजों को हायर सेंटर ले जाते के क्रम में ही मौत हो जाती है. लोगों का कहना है कि अगर सिटी स्कैन की सुविधा यहां होती तो घायलों की जान बच सकती है.इसके बावजूद भी अस्पताल प्रबंधन सिटी स्कैन कराने में विफल साबित हो रहा है .वही मरीज को हो रही परेशानी को देखते हुए कई बार जनप्रतिनिधियों के द्वारा धरना भी की जाती है .वही अधिकारियों के द्वारा बताया गया कि हर महीने आवेदन दिया जाता है लेकिन स्वास्थ्य विभाग सचिव और प्रधान सचिव इस आवेदन पर कोई पहल नहीं कर रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रधान सचिव द्वारा आस्वासन दिया जाता है कि तैयारियां चल रहा है. इस सदर अस्पताल में न ही अल्ट्रासाउंड है न ही सिटी स्कैन न ही वही कुछ दिन पहले आईसीयू की सुविधा की शुरुआत की गई है. सिटी स्कैन एवम अल्ट्रासाउंड नही रहने के कारण बिचौलियों की चांदी बनी होती है. अगर कोई गंभीर मरीज सदर अस्पताल में आता है तो उसे सदर अस्पताल से हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है इसके बाद सदर अस्पताल के बाहर घूम रहे बिचौलियों के द्वारा उसे प्राइवेट निजी क्लीनिक में सिटी स्कैन के लिए ले जाया जाता है. और वहां अल्ट्रासाउंड या सिटी स्कैन कराया जाता है. और उनके साथ जमकर किया जाता है आर्थिक शोषण .अगर यह सब व्यवस्था सदर अस्पताल में होगी तो काफी हद तक मरीजों का जान बचना संभव होगा.और आर्थिक रूप से मरीजों को परेशानी नही झेलनी पड़ेगी.
