BIhar: अब साइबर क्राइम की भी फ्रेंचाइजी जामताड़ा गिरोह बिहार के युवाओं से करा रहा ठगी 4 से 30 प्रतिशत तक देते हैं कमीशन - The Ujala Times News
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BIhar: अब साइबर क्राइम की भी फ्रेंचाइजी जामताड़ा गिरोह बिहार के युवाओं से करा रहा ठगी 4 से 30 प्रतिशत तक देते हैं कमीशन

बिहार में साइबर अपराध अब आउटसोर्स हो रहा है। जामताड़ा गिरोह बिहार में यह काम दे रहा है, बाकायदा परसेंटेज तय है। यह धंधा कितना फल-फूल रहा है उसका प्रमाण है कि महज 4 महीने में 74 करोड़ रुपए की साइबर ठगी हो चुकी है। यह राज्य में हाल के वर्षों में अपराध का नया चेहरा है। नया पैटर्न यह है कि साइबर ठगी के लिए शेल कंपनियां बनाकर रकम लोगों के खातों से उड़ाई जा रही है। बिहार में जितने आर्थिक अपराध हो रहे हैं उसमें 50 % से अधिक की हिस्सेदारी साइबर क्राइम की है।

कारण भी साफ है-नित नई शैली और बिना किसी खतरे के करोड़ों रुपए की आमद। राज्य के आम आदमी से लेकर मुख्य सचिव तक इस अपराध के शिकार हो चुके हैं। इन अपराधियों के दर्जनों स्लीपर सेल इसे अंजाम दे रहे हैं। साइबर क्राइम में आए बूम के पीछे बड़ी वजह जामताड़ा गैंग के नेटवर्क का बिहार कनेक्शन है। बिहार के साइबर अपराधी पहले ट्रेनिंग लेने जाते थे। अब जामताड़ा गिरोह ने बाकायदा फ्रेंचाइजी सिस्टम शुरू कर दिया है।

हर काम के लिए तय है परसेंटेज : जामताड़ा गैंग अब सीधे नहीं, छोटे-छोटे गिरोहों को काम सौंप रहा है। दैनिक भास्कर ने जब इस अपराध की दुनिया के भीतर झांका तो पता चला कि जामताड़ा गैंग गिरोहों को कमाई का फिक्स्ड परसेंटेज दे रहा है। आउटसोर्स पर काम करने वाले साइबर गिरोह के कई स्तर हैं। अलग-अलग विंग हैं। इसके लिए बिहार के साइबर अपराधियों को ट्रेनिंग के बाद ठगी के साफ्टवेयर, वेबसाइट और लिंक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ठगी की कमाई में 4 से 30 प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता है।

जानिए… सिस्टम व हर स्टेज पर कितना है कमीशन

1.बैंक खाते उपलब्ध करवाने वाले : इस टीम को जितनी रकम उनके खाते में आती है उसका 10% मिलता है।

2. खाते से पैसा निकालने वाले : खातों से पैसे निकालने वाला गिरोह 8% कमीशन पर काम करता है।

3.कॉल करने वाला गिरोह : साइबर अपराध का कॉल सेंटर नवादा है। कॉलिंग गिरोह 25% कमीशन लेता है।

4. डाटा उपलब्ध कराने वाले : यह साइबर अपराधियों को डाटा उपलब्ध कराता है। एवज में 2% कमीशन फिक्स्ड है।

5. फर्जी दस्तावेज पर सिम कार्ड: सिम उपलब्ध कराने वाला अलग गिरोह है। यह भी 2% कमीशन लेता है।

  • यह नेटवर्क जामताड़ा गैंग से फ्रेंचाइजी लेने वाले एक खास व्यक्ति के नीचे काम करता है। फ्रेंचाइजी कमाई का 10% रखता है और बाकी जामताड़ा गिरोह के खाते में जमा करवा देता है।

यह, साइबर अपराधियों द्वारा ठगी गई रकम का आंकड़ा है जिनकी शिकायतें जब से राज्य में साइबर सेल खुला है उसके पोर्टल पर दर्ज हुई हैं। इससे इतर हर जिले के थानों में भी साइबर ठगी के मामले दर्ज हैं। साइबर सेल के अफसर मानते हैं कि बहुत सी शिकायतें आती हीं नहीं और लोग ठगी के बाद चुपचाप एकदम शांत बैठ जाते हैं।

बिहार में क्यों बढ़ा साइबर अपराध

  • साइबर सेल के एसपी सुशील कुमार के अनुसार बिहार में मामले अधिक दिखने की सबसे बड़ी वजह है अपराध का दर्ज होना। साइबर सेल ऐसी शिकायतों पर लगातार काम कर रहा है इसकी वजह से मामले बढ़े हैं।
  • दूसरी वजह है कि साइबर क्राइम का लैंडस्केप बढ़ा हैं। जितनी तेजी से डिजिटल प्लेटफार्म का उपयोग बढ़ा है उस हिसाब से लोगों में जागरूकता की कमी है और वे आसानी से इसके शिकार हो रहे हैं।

साइबर कानून कमजोर होना भी बड़ी वजह

  • साइबर अपराध के मामलों में अधिकतम 3 से 5 साल की सजा है। अपराधियों को जल्दी जमानत मिल जाती है और वे फिर क्राइम में संलिप्त हो जाते हैं। हां, साइबर टेररिज्म में 10 साल तक की सजा है लेकिन ऐसे मामले बहुत कम आते हैं।
  • साइबर क्राइम से जुड़े मामले IT एक्ट 2000 के तहत चलते हैं. अपराधियों के खिलाफ धारा 43, 65, 66 और 67 के तहत केस चलते हैं.आईपीसी की धारा 420, 120बी और 406 के तहत भी केस चल सकता है।

कमीशन पर धंधे के 3 केस

1.बैंकों का कस्टमर केयर बना पैसे उड़ाना : हाल ही में एक ऐसा गिरोह पकड़ा गया है जो जामताड़ा गिरोह के लिए 4 प्रतिशत कमीशन पर काम कर रहा था। इस गिरोह ने लगभग सभी बैंकों के कस्टमर केयर का बेबसाइट बना रखा था।

2.ठगी के पैसे से कूपन खरीदना, उसे भुनाना : जामताड़ा गैंग वेबसाइट www.couponcode.in से कूपन खरीद कर कमीशन एजेंट को भेजता जो इसे रीडीम कर सामान खरीदकर बेचता और प्राप्त रुपए में से 30% कमीशन काट पैसे जामताड़ा भेजता है।

3. शेल कंपनियां बनाना फिर झांसा देना : साइबर अपराधियों ने छोटी-छोटी शेल कंपनियां खोल ठगी शुरू की है। कंपनी के नाम पर पहले बैंक में खाते खुलवाए जाते हैं। फिर इन खातों में ठगी के पैसे मंगाए जाते हैं।

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