Madepura:उगते सूरज को अर्घ्य देने के साथ ही संपन्न हुआ छठ महापर्व

उगते सूर्य को अर्घ्य देकर महापर्व का समापन हुआ। रविवार की शाम छठ व्रतियों ने विभिन्न नदियों, तालाबों, तालाबों और घरों के सामने गड्ढे खोदकर उसमें पानी डालकर उगते सूरज को अर्घ्य दिया। छठ व्रती का व्रत भी सोमवार सुबह अर्घ्य के साथ समाप्त हुआ. प्रातः काल सूर्य के लाल होते ही छठ भक्तों के चेहरे खिल उठे और भगवान सूर्य देव को अर्घ्य दिया।

शहर के सुखासन घाट, भीरखी घाट, गोमती घाट, बेल्हा घाट, गौशाला घाट, गोमती पुल घाट, जयपालपट्टी घाट, पतराहा पोखर, महिला महाविद्यालय के पूरब घाट, साहूगढ़ नदी घाट पर हजारों लोगों ने भगवान भास्कर की पूजा की. अर्घ्य देकर मनाया छठ पर्व सोमवार की सुबह शहर संगीत, छठ घाट और साज-सज्जा से जगमगा उठा। रात में छठ घाट पर जलता हुआ दीया इसकी शोभा बढ़ा रहा था। छठ पूजा के लिए भीरखी नदी छठ घाट पर मेले का भी आयोजन किया गया। जहां छोटे बच्चों ने झूले का लुत्फ उठाया। इसके साथ ही मेले में नाश्ते की दुकान और खिलौनों की दुकान भी बच्चों के लिए बहुत अच्छी है वहीं छठ घाटों पर बच्चों ने आतिशबाजी का भी खूब लुत्फ उठाया

. छठ की शुरुआत 28 अक्टूबर को नहाय खाय के साथ हुई थी. छठ का ये पर्व संतान की सुख समृद्धि, अच्छे सौभाग्य और सुखी जीवन के लिए रखा जाता है. साथ ही यह व्रत पति की लंबी उम्र की कामना के लिए भी रखा जाता है.

छठ का धार्मिक महत्व
ऐसी मान्यता है कि सूर्य देव की पूजा करने से तेज, आरोग्यता और आत्मविशवास की प्राप्ति होती है. दरअसल, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य ग्रह को पिता, पूर्वज, सम्मान का कारक माना जाता है. साथ ही छठी माता की अराधना से संतान और सुखी जीवन की प्राप्ति होती है. इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह पर्व पवित्रता का प्रतीक है.
