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Chaurchan Pooja चौरचन पूजा आज, जानें चंद्रदेव के पूजन का समय

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को चौरचन का पर्व मनाया जाता है। पंडित व ज्योतिषाचार्य के मुताबिक भाद्र शुक्ल रोहिणी नक्षत्र में चतुर्थी चन्द्र की पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार, आज 06 सितंबर को चतुर्थी चांद का पूजन किया जाएगा। कोसी और मिथिलांचल के लिए चौरचन पर्व का बड़ा महत्व होता है। इस पर्व को लेकर लोगों में काफी उत्साह और हर्षोल्लास का माहौल रहता है। जिस तरह से छठ में सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है, वैसे ही चौरचन में चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। महिलाएं छठ पर्व की तरह ही इस दिन पकवान बनाती है और पति-बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन के लिए व्रत रखती हैं। आइए जानते हैं चौरचन पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजाविधि और महत्व
- चौरचन पूजा की सही डेट : जगन्नाथ मंदिर के पंडित सौरभ कुमार मिश्रा ने बताया कि भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को कलंक चतुर्थी और चौथ चंद पूजन होगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, 06 सितंबर को चतुर्थी चौथ का पूजन किया जाएगा। 6 सितंबर को दोपहर 12:17 मिनट पर चतुर्थी तिथि आरंभ होगी और अगले दिन 07 सितंबर को दोपहर 02 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। इसलिए 6 सितंबर को ही चतुर्थी चौथ चांद का पूजन किया जाएगा।
- चौरचन पूजा में चंद्रदेव के पूजन का समय: शुक्रवार को चंद्रमा का उदय व चौथ पूजन का समय शाम को 07 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगा और रात 08 बजकर 16 मिनट तक चौथ की चांद का पूजन किया जा सकेगा।
- चौरचन पूजाविधि : आज शुक्रवार को चौरचन पूजा के दिन महिलाएं चौरचन चांद का व्रत करेंगी। शाम को फल,पकवान और बताशा आदि डालिया में भरकर चंद्रोदय के बाद चांद को कच्चे दूध से अर्घ्य देकर पूजन करेंगी। इस दिन संध्या बेला में चंद्रदेव की पूजा की जाती है। ऋतु फल डालिया में भरकर चंद्रमा को अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत से पुत्र की आयु में वृद्धि होती है और झूठे कलंक से रक्षा होती है।
