स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कप. मधेपुरा सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार के निलंबन की चर्चा, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप - The Ujala Times News
ब्रेकिंग न्यूज़

स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कप. मधेपुरा सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार के निलंबन की चर्चा, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप

अमन श्रीवास्तव
मधेपुरा

भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोप पर जिलाधिकारी ने जांच कर सत्य पाते हुए स्वास्थ्य विभाग को भेजा था पत्र

भ्रष्टाचार के आरोपों और जांच के बाद कार्रवाई की खबर से बढ़ी हलचल.

मधेपुरा जिले के स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आने के बाद पूरे महकमे में हलचल तेज हो गई है. मधेपुरा के सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार को विभाग की ओर से निलंबित किए जाने की चर्चा स्वास्थ्य विभाग में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर इसे महत्वपूर्ण कदम माना गया.सिविल सर्जन के खिलाफ सामने आए कथित रिश्वत प्रकरण ने पहले ही जिले के स्वास्थ्य महकमे को सवालों के घेरे में ला दिया था.विदित हो कि अगस्त 2026 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित हुआ था. जिसमें डॉ. विजय कुमार पर रुपये लेने का आरोप लगाया गया. वीडियो के प्रसारित होने के बाद जिलाधिकारी अभिषेक रंजन ने मामले का संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया था.जांच का उद्देश्य वीडियो की सत्यता और पूरे प्रकरण की परिस्थितियों की पड़ताल करना था.

वायरल वीडियो के बाद शुरू हुई जांच—-

प्राप्त समाचार रिपोर्टों के अनुसार, कथित वीडियो में सिविल सर्जन को निजी नर्सिंग होम से जुड़े लोगों से नकद राशि लेते हुए दिखाए जाने का दावा किया गया था. मामले को लेकर प्रशासन ने जांच के आदेश दिए. जांच दल में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, जिला गोपनीय शाखा के प्रभारी पदाधिकारी और जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी को शामिल किया गया था.जांच के दौरान मुरलीगंज और उदाकिशुनगंज क्षेत्र के निजी नर्सिंग होम से जुड़े लोगों से पूछताछ किए जाने की भी जानकारी सामने आई थी. रिपोर्टों में जांच दल द्वारा बयान और अन्य साक्ष्य जुटाए जाने का उल्लेख किया गया था.वहीं, सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए इसे साजिश करार दिया था.

जिलाधिकारी की रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग को भेजा गया था प्रस्ताव

27 अगस्त 2026 को प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट में बताया गया था कि जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर सिविल सर्जन के खिलाफ प्रपत्र ‘क’ गठित कर स्वास्थ्य विभाग को कार्रवाई के लिए भेजा गया.रिपोर्ट में जिलाधिकारी के हवाले से कहा गया था कि जांच में आरोपों को सही पाया गया. हालांकि, किसी भी अधिकारी के खिलाफ अंतिम विभागीय निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी के आदेश और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर ही माना जाएगा.

अब निलंबन की चर्चा सामने आने के बाद जिले के लोगों की नजर स्वास्थ्य विभाग की प्रशंसा की है. संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने का अवसर भी मिल सकता है.

भ्रष्टाचार के आरोपों पर लगातार उठते रहे सवाल

स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं. सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर इलाज, दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सकों की जवाबदेही और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के नियमन जैसी व्यवस्थाएं आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं.ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई की मांग स्वाभाविक रूप से सामने आई है.

मई 2026 में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और इंडियन डेंटल एसोसिएशन से जुड़े चिकित्सकों द्वारा भी सिविल सर्जन की कार्यप्रणाली को लेकर आरोप लगाए जाने की खबरें प्रकाशित हुई थीं. इन आरोपों में निजी चिकित्सकों और क्लीनिक संचालकों को परेशान करने तथा मनमानी का उल्लेख किया गया था. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और उन पर अंतिम निर्णय की जानकारी अलग-अलग स्तरों पर निर्भर करती है.

कार्रवाई से स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की उम्मीद—

सिविल सर्जन जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सदर अस्पताल सहित विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की निगरानी, चिकित्सा व्यवस्था का संचालन, स्वास्थ्य योजनाओं का क्रियान्वयन और स्वास्थ्य संस्थानों से संबंधित प्रशासनिक कार्य उनकी जिम्मेदारियों में शामिल होते हैं. ऐसे पद पर बैठे अधिकारी के खिलाफ किसी भी गंभीर आरोप की जांच निष्पक्ष तरीके से होना जरूरी है.यदि मरीजों के इलाज, अस्पतालों के संचालन और स्वास्थ्य योजनाओं पर किसी तरह का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़े, इसके लिए वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक होगा.

वही नए सिविल सर्जन के रूप में डीआईओ डा बिपिन गुप्ता को मधेपुरा के नए सिविल सर्जन नियुक्त किया गया.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button