बिहार पुलिस एसोसिएशन की दो टूक: 8 घंटे से अधिक ड्यूटी करने वालों को मिले ओवरटाइम और रिस्क अलाउंस - The Ujala Times News
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बिहार पुलिस एसोसिएशन की दो टूक: 8 घंटे से अधिक ड्यूटी करने वालों को मिले ओवरटाइम और रिस्क अलाउंस

विशेष संवाददाता पटना: बिहार में कानून व्यवस्था संभालने वाले पुलिसकर्मियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। बिहार पुलिस एसोसिएशन (Bihar Police Association) ने पुलिस महकमे में लंबे समय से चली आ रही काम के घंटों की समस्या पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। एसोसिएशन ने मांग उठाई है कि 8 घंटे से अधिक ड्यूटी करने वाले सभी पुलिसकर्मियों को ओवरटाइम (Overtime), रिस्क अलाउंस (Risk Allowance) और हार्डशिप अलाउंस (Hardship Allowance) — यानी कुल तीन महत्वपूर्ण भत्तों का भुगतान उनकी मूल सैलरी के साथ जोड़कर किया जाए।

क्या है एसोसिएशन की मुख्य मांगें?

बिहार पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि पुलिसकर्मियों पर ड्यूटी का मानसिक और शारीरिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। तय मानकों के अनुसार ड्यूटी के घंटे 8 तय होने चाहिए, लेकिन मैदानी स्तर पर स्थिति बिल्कुल उलट है। इसी को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित तीन प्रमुख भत्तों की मांग की गई है:

  1. ओवरटाइम अलाउंस: 8 घंटे की तय सीमा से ज्यादा (10 से 14 घंटे तक) काम करने वाले जवानों को अतिरिक्त समय का पूरा मेहनताना मिले।
  2. रिस्क अलाउंस: अपराधियों की धरपकड़, वीआईपी सुरक्षा और संवेदनशील इलाकों में तैनात रहने वाले पुलिसकर्मियों को उनके जोखिम भरे काम के एवज में सुरक्षा भत्ता दिया जाए।
  3. हार्डशिप अलाउंस: कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, लगातार भागदौड़ और छुट्टियों के बिना काम करने की स्थिति में जवानों को मानसिक व शारीरिक कठिनाई भत्ता (हार्डशिप अलाउंस) प्रदान किया जाए।

“तनावमुक्त होकर काम करें तभी बेहतर परिणाम मिलेंगे”

एसोसिएशन से जुड़े प्रतिनिधियों का तर्क है कि जब तक पुलिसकर्मियों को उनके काम के हिसाब से उचित पारिश्रमिक और सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तब तक वे पूरी क्षमता के साथ कार्य नहीं कर पाएंगे। अत्यधिक कार्यघंटों के कारण पुलिसकर्मियों में तनाव बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य और कार्यकुशलता पर पड़ रहा है।

पुलिसर्किमयों के इस वर्ग का मानना है कि यदि सरकार इन तीनों भत्तों को सीधे सैलरी के साथ जोड़ देती है, तो इससे न केवल जवानों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि विभाग में अनुशासन और कार्यक्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। अब देखना यह है कि राज्य सरकार और गृह विभाग इस बहुप्रतीक्षित मांग पर क्या और कब निर्णय लेता है।

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