डिजिटल क्रांति: इंटरनेट डेटा खपत में बिहार ने देश के बड़े राज्यों को पछाड़ा, यूट्यूब बना नंबर-1
- – बिहार में रोजाना हो रही है 49.1 पेटाबाइट (PB) डेटा की खपत – वीडियो स्ट्रीमिंग और रील्स के क्रेज से पहले स्थान पर पहुंचा सूबे का यूजर

देशभर में डिजिटल तकनीक और स्मार्टफोन्स की बढ़ती पहुंच के बीच इंटरनेट डेटा खपत को लेकर एक चौंकाने वाली और दिलचस्प रिपोर्ट सामने आई है। मोबाइल इंटरनेट डेटा के इस्तेमाल के मामले में बिहार ने महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और अधिक आबादी वाले राज्यों को पीछे छोड़ते हुए देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है। खास बात यह है कि राज्य के लोगों की इंटरनेट पर सबसे ज्यादा पसंद ‘यूट्यूब’ (YouTube) बनी हुई है।
रोजाना खर्च हो रहा 49.1 पेटाबाइट डेटा
दूरसंचार क्षेत्र के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में रोजाना औसतन 49.1 पेटाबाइट (PB) डेटा की खपत हो रही है। अगर इसे सामान्य गणित में समझें, तो यह आंकड़ा लगभग 5 करोड़ 14 लाख जीबी (GB) प्रतिदिन के बराबर बैठता है। इस भारी-भरकम डेटा खपत के साथ बिहार ने महाराष्ट्र (48.7 पीबी) को दूसरे और उत्तर प्रदेश (पूर्व) को तीसरे पायदान पर छोड़ दिया है।
यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा खर्च हो रहा डेटा
बिहार के लोग अपने मोबाइल डेटा का सबसे बड़ा हिस्सा वीडियो देखने और सोशल मीडिया पर मनोरंजन के लिए खर्च कर रहे हैं। विभिन्न प्लेटफॉर्म्स की डेटा हिस्सेदारी इस प्रकार है:
- यूट्यूब (YouTube): कुल इंटरनेट डेटा खपत में अकेले यूट्यूब की हिस्सेदारी 24.3 प्रतिशत है। यानी राज्य में खर्च होने वाले कुल डेटा का लगभग एक चौथाई हिस्सा सिर्फ यूट्यूब पर वीडियो देखने में जा रहा है।
- इंस्टाग्राम (Instagram): शॉर्ट्स और रील्स के बढ़ते क्रेज के कारण इंस्टाग्राम 21.7 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है।
- फेसबुक (Facebook): इस फेहरिस्त में फेसबुक 17.5 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर बना हुआ है।
- अन्य प्लेटफॉर्म: इसके बाद गूगल सर्च और अन्य ऑनलाइन गतिविधियों की हिस्सेदारी 5.2 प्रतिशत तथा व्हाट्सएप की हिस्सेदारी करीब 3.5 प्रतिशत है।
कम टेली-डेंसिटी के बावजूद रिकॉर्ड खपत
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्राई (TRAI) के पिछले आंकड़ों के मुताबिक बिहार में टेली-डेंसिटी (आबादी के अनुपात में फोन कनेक्शन) देश के अन्य कई राज्यों के मुकाबले कम है, इसके बावजूद यहां प्रति यूजर डेटा की खपत का यह स्तर इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोग स्मार्टफोन और वीडियो कंटेंट से तेजी से जुड़ रहे हैं। सस्ते डेटा पैक और गांवों तक पहुंच रहे तेज इंटरनेट ने सूबे की युवा पीढ़ी के डिजिटल व्यवहार को पूरी तरह बदल दिया है।
