चाय के दुकान पर चुनाव को लेकर चर्चा - The Ujala Times News
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चाय के दुकान पर चुनाव को लेकर चर्चा

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*अमन श्रीवास्तव*

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संस्थापक सह सीईओ

चेहरे से छलक रहा सियासी प्रत्याशियों को लेकर आज भी बना है किसकी होगी जीत किसकी हार

कोई पार्टी के साथ तो कोई निर्दलीय की कर रहे प्रशंसा

शहर पर अब विधानसभा चुनाव का रंग चढ़ने लगा है. क्योंकि अब सिर्फ पहला चरण का मतदान छह नवंबर को है जिस कारण चौक-चौराहे गुलजार होने लगे हैं और दुकानों पर चाय की चुस्की के साथ सियासी उबाल भी दिखने लगा है. चाय की चुस्की पर ही नेता तय किए जा रहे हैं और लोग बिहार में सरकार भी बना रहे हैं. अलबत्ता कहीं लोकल मुद्दों की बात हो रही है तो कहीं नेताजी के जनसरोकार का सवाल भी उछाल खा रहा है. चाहे चाय की कोई दुकान हो, लोग जुटते हैं और एक दूसरे से चुनावी चर्चा शुरू कर देते हैं. कभी-कभी दमदार बहस तक हो जाती हैऔर फिर लोकल चयन पर बात खत्म हो जाती है. शुक्रवार को पानी टंकी चौक के समीप मुन्ना की चाय दुकान पर भी कुछ ऐसा ही नजारा नजर आया. यहां कुछ लोग चाय की चुस्की के साथ चुनावी मुद्दा गढ़ रहे थे तो कुछ चुनावी मैदान में नजर आने वाले नेताजी को लेकर लोगों के बीच तर्क-वितर्क कर रहे थे. ‘अबकी बार आप देखते रह जाइयेगा फलनवा, सब कुछ बदल जाएगा और उनका त जमानतवे नहीं बचेगा… अरे, ई पब्लिकवा का मूड आपको नहीं दिख रहा है, बहुते दिन हो गया है… सब सरकारे को बदल देना चाहता है ! अरे, ई आप का बोल रहे हैं राजू भाई, राजनीति का बात तनिको नहीं समझते हैं का… राजू जी की बात सुनते ही चुन्नू बाबू जैसे भड़क गये. बोले, ई सरकार का बहुते दिन आपको दिख गया पर ऊ दिन आप भूल गये कि अंधेरा होते अपना सब बाजार बंद हो जाता था… सबेरे जब घरवा से निकलते थे तऽ आपके सही सलामत घर लौटने के लिए भाभीजी भगवान के आरती उतारती थी…! दोनों बगल के दफ्तर से निकल कर चाय पीने आए थे और चाय के साथ चुनाव में उलझ गये थे. वहां पहले से चाय की चुस्की ले रहे नीरज बाबू और गणेश बाबू भी आमने-सामने होने लगे थे. यह बहस और बढ़ती पर लड्डू बाबू टपक गये. कहा-कहां दूर जा रहे हैंऽ, पहले अपना गांव घर देखिये… विकास का हुआ, केतना हुआ उ तऽ झलकिये रहा है… क्या नहीं हुआ और कैसे होगा, कौन केतना दिलचस्पी रखता है, यह देखना जरुरी है. लड्डू बाबू के आते ही विकास के पक्ष में खुल कर बोल रहे मन्नूलाल और संजू झा भी कुछ पहल के लिए खामोश हो गये. फिर बहस में थोड़ा बदलाव आ गया.
बहस आगे बढ़ी और चुनावी अखाड़े के पहलवानों की जीत-हार का समीकरण बनने लगा. हालांकि चर्चा सिर्फ सदर सीट के चली थी पर बात पहले जिले के चारों सीट पर चल पड़ी और फिर मधेपुरा की सियासत का गणित भी उलझता-सुलझता रहा. इस बात पर कई लोग सहमत हुए कि इस बार चुनाव में एनडीए को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. किसी ने आरजेडी तो किसी ने जनसुराज तो किसी ने आप तो किसी ने निर्दलीय फैक्टर पर अलग-अलग तर्क दिए.मधेपुरा विधानसभा से नगर परिषद की वर्तमान में चैयरमैन रही कविता साहा जिन्हें जेडीयू का टिकट मिला है कही यही न बाजी मार ले .चर्चा के दौरान राष्ट्रीय से लेकर स्थानीय मुद्दों के साथ ही बेरोजगारी, पलायन, किसानों की समस्या, महंगाई और शिक्षा व्यवस्था को लेकर लोग सरकार पर निशाना भी साध रहे थे. चर्चा में शामिल संतोष सिंह कह रहे थे कि पहले क्या स्थिति थी, अब हर पंचायत में हाईस्कूल खुल गया है. गांवों में महिलाएं जागरूक हुई हैं और लघु उद्योग या कारोबार भी कर रही हैं. जाति-पाति, भ्रष्टाचार और विकास से निकलते हुए चुनाव की चर्चा प्रत्याशियों के नाम पर होने लगती है. यहां मौजूद अमर कहते हैं कि इस बार का चुनाव रोचक होगा. चर्चा में शामिल गोप बाबू यह कहते हुए चाय का सिकोड़ा खाली करते हैं कि चलिए, विकास से ही बिहार और देश आगे बढ़ सकता है, जो विकास करेगा, जनता उसी का समर्थन करेगी.

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